पटना: अगुवाई की चर्चा जोरों पर है?आगामी लोकसभा चुनाव के लिए #BJP4IND अलर्ट है?बर्ष 2014 के इतिहास को दोहराने की तैयारियों में जुट चुकी है। गृहमंत्री का पद अमूमन आजकल के फैशनेबल ट्रेंड में सीएम त्याग कर सहयोगी को देते रहे हैं। कई राज्यों में उदाहरण मिल जायेंगे। बिहार में सम्भवतः पहली बार प्रयोग हुआ, लेकिन मायने तो रखता ही है?सन्योग से सहयोगी ने 20 वर्षों बाद गृह त्याग कर नेतृत्व का फैसला मित्र दल को देने का निर्णय लिया है। आगामी नेतृत्व के लिए संदेश देने के लिए होता है!एक आम #politicalexpert के रूप में जो देख पा रहा हूं, कि पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह एक दशकों से अनुभवी नेताओं को केंद्र से जोड़ने की कवायद प्रारम्भ कर चुके है?
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मनोहर परिकर #गोवा से आए थे!पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान #मध्यप्रदेश से। #झारखंड से पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद अर्जुन मुंडा पहुंचे थे?#हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर भी हैं,जो 2024 से विद्युत मंत्री और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। अब #बिहार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आगे शामिल हो जाएंगे। बीजेपी में आज भी या पहले भी सीएम टैग को केंद्र से जोड़ने की परम्पराओं के दर्जन भर उदाहरण मिलेगे। चाहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह या पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अक्टूबर से दिसंबर 1998 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं।वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं और उन्होंने 52 दिनों तक इस पद पर कार्य किया था।
#लोकसभा चुनाव की तैयारी की कवायद क्या जारी है। इसलिए बिहार के लिए सबकुछ स्पष्ट ही है कोई नया दाव_पेंच रचे जाने की संभावना नहीं है? शायद आगे के विरासत को सम्भालने की जिम्मेदारी है? एक सम्राट का दूसरे सम्राट के लिए गृह मंत्रालय के त्याग में ही मूल संकेत छिपा है। #उत्तरप्रदेश वाला हाल #BIHAR में नहीं हो? एनडीए अभी से चौकन्ना है!बिहार में जदयू के उत्थान को देखने बाद पार्टी को अन्य राज्यों में मजबूत करने का मौका मुख्यमंत्री #NitishKumar नहीं चूकना चाहते हैं। बहुत स्वस्थ्य नहीं रहने एवं ढलती उम्र के उपरांत भी केंद्र की सियासत से अन्य राज्यों में असरदार साबित हो सकते हैं। बिहार में अब जल्द होने वाले #RajyaSabhaElection 2026 के चुनाव के दौरान एनडीए की तैयारी पूरी तरह सार्वजनिक होगा। उठापटक या फिर सबकुछ समान्य?विपक्ष एक सीट नहीं जीतकर कमजोर साबित होगा? ऐसा प्रतीत होता है कि साहस नहीं? केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और कमजोर दावेदारी के साथ केंद्रीय मंत्री Chirag पासवान को आगे किया जाए?ऐसा किए जाने की संभावना क्षीण है। दो उपमुख्यमंत्री जदयू की ओर से बनाये जा सकते हैं ताकि जातिगत संतुलन बना रहे।








