किशनगंज (दिघलबैंक): भारत‑नेपाल सीमा पर स्थित किशनगंज जिले के दिघलबैंक चेकपोस्ट पर अब यात्रियों का दौरा पहले की तरह आसान नहीं रहेगा। सुरक्षा बलों ने यहां सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है, ताकि सीमा पार घुसपैठ, हथियार या भाईभांग गतिविधियों का जोखिम कम से कम रह सके। अब नेपाल से भारत आने वाले हर यात्री को चेकपोस्ट पर बने डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) या वॉक‑थ्रू गेट से होकर गुजरना अनिवार्य होगा।
सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि चेकपोस्ट पर अब हवाई अड्डे, मेट्रो स्टेशन और शॉपिंग मॉल की तर्ज पर सुरक्षा जांच गेट स्थापित किया गया है। जिसे इस उद्देश्य से लगाया गया है कि आने‑जाने वाले लोगों में छुपी खतरनाक वस्तु, हथियार या अन्य संदिग्ध सामग्री आसानी से पकड़ में आ सके। इसके साथ ही पहचान पत्र (आईडी) दिखाना भी अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे हर व्यक्ति की वैधता पुष्ट की जा सके।
इस संबंध में दिघलबैंक कंपनी के सहायक कमांडेंट प्रिय रंजन चकमा ने बताया कि नेपाल से आने वाले सभी लोगों की पहचान पत्र और फिर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर के माध्यम से ऑटोमेटिक जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस आधुनिक व्यवस्था से सुरक्षा जांच तेज, अधिक सटीक और पारदर्शी होगी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। दिघलबैंक चेकपोस्ट रोजाना भारत और नेपाल के बीच सैकड़ों लोगों के आवागमन का प्रमुख मार्ग है, जिसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
दोनों देशों के नागरिक निर्माणाधीन सड़क की मरम्मत, रोजमर्रा की वस्तुएं, व्यापार, आयात‑निर्यात और चिकित्सा सुविधाओं के लिए इस मार्ग का उपयोग करते हैं। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब चेकपोस्ट पर मशीन‑आधारित जांच लागू की गई है, जिससे घुसपैठ, अवैध हथियार या अन्य जोखिम वाले गुजारिश को रोकने में मदद मिलेगी। ग्रामीण और व्यापारियों ने इस कदम की सराहना की है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि नई व्यवस्था से लंबी कतारों और देरी के खतरे को कम करने के लिए जांच प्रक्रिया तेज व पारदर्शी रखने पर जोर दिया जाए।








