नवादा: बिहार सरकार के पूर्व राज्य मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव और नवादा की जदयू विधायक विभा देवी के पुत्र अखिलेश कुमार यादव की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पूरा जिला शोक और आक्रोश की स्थिति में रहा। अखिलेश की मौत गुरुवार को पटना के मेदांता अस्पताल में उनके सिर और शरीर की गंभीर चोटों के बाद हुई थी, जिसके बाद राजनीतिक –सामाजिक गलियारों में भारी भावुकता छा गई।
इस घटना से आहत राजबल्लभ यादव के समर्थकों ने नवादा के धर्मशिला अस्पताल के सामने एक जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पार्षद के पति संजय यादव कर रहे थे, जो साफ तौर पर कह रहे थे कि अखिलेश की मौत धर्मशिला अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने चिकित्सकों पर आपराधिक मामले की कार्रवाई और दंड की मांग करते हुए भीड़ से अपील की कि अगर कार्रवाई नहीं होती, तो सख्त आंदोलन और हंगामे का रास्ता भी अपनाया जाएगा।
पूर्व राज्यमंत्री राजबल्लभ यादव ने बताया कि उनका बेटा अखिलेश यादव घर के पास से ही थार गाड़ी लेकर निकला था, लेकिन कुछ ही दूरी पर गाड़ी अनियंत्रित होकर तार के पेड़ से टकरा गई। इस दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें धर्मशीला अस्पताल में भर्ती कराया गया। राजबल्लभ का आरोप है कि बाहरी तौर पर शरीर पर कोई निशान नहीं थे, लेकिन डॉक्टरों ने पर्याप्त जांच और त्वरित रेफर नहीं किया, और अखिलेश को लगभग सात घंटे तक अस्पताल में रोककर रखा गया। इसी देरी के कारण, उनके अनुसार, अंदर से रक्तस्राव शुरू हो गया, जिससे प्राणघातक स्थिति बनी।
उन्होंने दावा किया कि अगर धर्मशिला अस्पताल के चिकित्सक तत्परता बरतते तो बेटे की जान बच सकती थी। उन्होंने यह तक कहा कि इसे मौत से ज्यादा एक तरह की हत्या माना जाए, क्योंकि डॉक्टरों ने जानबूझकर लापरवाही की। सात घंटे बाद जाकर उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। राजबल्लभ का मानना है कि समय रहते उन्हें पटना ले जाया जाता तो जान बच सकती थी, और इस जांच‑प्रक्रिया में जिम्मेदार डॉक्टरों और प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
स्थानीय लोग भी इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन से नाराज़ दिखे। जहां एक तरफ परिवार का दर्द और आक्रोश है, वहीं जिला प्रशासन ने पहले से ही आवश्यक जांच और FIR प्रक्रिया शुरू करवा रखी है, ताकि निष्पक्ष जवाब दिया जा सके।








