ओडिशा की किशोरी अंजलि मुंडा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में रचा इतिहास!

रायपुर: कई बार एक छोटा‑सा फैसला जिंदगी बदल देता है। 2022 में, जब एक खेल शिक्षक ने कक्षा के बच्चों को अलग‑अलग खेल चुनने को कहा, तब 11 वर्षीय अंजलि मुंडा ने चुपचाप तैराकी का चयन किया—एक ऐसा खेल, जिसे वह शुरुआत में सिर्फ “पानी में मज़े करने वाला” खेल मानती थीं। चार साल बाद, वह ओडिशा के जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की यह किशोरी, रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में भारतीय पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता बनकर इतिहास रच चुकी हैं।

अंजलि का पानी से रिश्ता शुरूआत में सिर्फ खेल‑खेल में था। चार भाई‑बहनों में सबसे छोटी वह 10 साल की उम्र में कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज पहुंचीं, जहां जनजातीय छात्रों को निःशुल्क शिक्षा और आवास मिलता है। पहले उन्हें अपनी बड़ी बहन का तीरंदाजी से जुड़ा सफर प्रेरित करता था, लेकिन हौसले ने दामन पकड़ा और उन्होंने तैराकी में अपनी अलग राह चुन ली। तैराकी शुरू करने के एक साल बाद ही एक स्थानीय क्लब टूर्नामेंट में रजत पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। उनका कहना है, “वह मेरे जीवन का पहला पदक था, इसने मुझे यकीन दिलाया कि मैं इस खेल में अच्छा कर सकती हूं।”

यही यकीन उन्हें 200 मीटर फ्रीस्टाइल में 2:39.02 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीतने तक ले आया। इस मेडल ने न सिर्फ उन्हें खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता बनाया, बल्कि कर्नाटक की मजबूत तैराकी टीम को भी पहले दिन के सभी छह स्वर्ण लेने से रोक दिया। अंजलि का विश्वास है कि यह सफलता खेल मंत्रालय की अस्मिता लीग जैसी पहलों के बिना संभव नहीं होती। 2024 में संभलपुर में आयोजित खेलो इंडिया अस्मिता लीग में उन्होंने दो रजत पदक जीते और दो अन्य इवेंट्स में भी पदक के करीब रह गईं। इसी मानसिक तैयारी को आगे बढ़ाते हुए, गुवाहाटी में आयोजित खेलो इंडिया अस्मिता (यू‑15 & यू‑18) स्विमिंग लीग (ईस्ट जोन) में भी उन्होंने दो रजत पदक हासिल किए और रायपुर तक उसी स्तर का प्रदर्शन जारी रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला स्वर्ण जीता।

लेकिन इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद अंजलि पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका लक्ष्य अपने 2:25 के पर्सनल बेस्ट को भंग करना था, जो गुवाहाटी से रायपुर की लगातार यात्रा और थकान के चलते एक–दो दसवें ही दूर रह गया। अब 15 वर्षीय अंजलि की नज़र आगे के लड़ाई पर है—वह महिलाओं की 50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली में अपने पर्सनल बेस्ट को बेहतर करने के साथ‑साथ भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उद्घोषित नाम बनाने की योजना लेकर आगे बढ़ रही हैं।

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पोस्ट भारत • रिपोर्टर

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