पटना: विधायक अनंत सिंह की अनंत इच्छा से एनडीए महकमे को परेशानी हो रही है। अनंत खुलकर मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार का समर्थन कर रहे हैं। जो सोचा वह कर गुजरे। अब भी नया चाहत बांकी है। जब सियासत के मुखिया खामोश तो प्यादे!
जेल जाते_जाते अपने विरासत का ऐलान कर निकले तो अब छोटे सरकार यानि अनंत सिंह का स्पष्ट ऐलान सुर्खियों में है। कहा कि निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनना चाहिए। अब आगे बड़े बेटे अभिषेक को सौंपेंगे राजनीतिक विरासत। कहा कि जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश आगे नहीं होंगे तो यह मेरा भी अंतिम चुनाव है। खबर सुर्खियों में है?क्योंकि यह अचानक नहीं हुआ है दोनों पुत्रों का सियासत के आला नेताओं के साथ मेल मिलाप होता रहा है।
अनंत सिंह के जेल में रहने के दौरान पुत्र भी सियासत में सक्रिय रहे हैं। दोनों ने ही उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एमिटी विश्विद्यालय में पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। दोनों जुड़वा भाइयों की उम्र 24 साल बताई जाती है। दोनों भाई अभिषेक और अंकित के लन्दन में पढ़ाई के लिए चले जाने की खबर और तस्वीरों ने सुर्खियां बटोरा था। बर्ष 2005 से मोकामा से विधायक अनंत सिंह की इच्छा थी कि राजनीतिक शास्त्र से स्नातकोत्तर भी हासिल करें। जिसके बाद उनके पुत्र लंदन के प्रतिष्ठित विश्विद्यालय में नजर आए थे।
मोकामा गोली कांड के बाद बेटे को लंदन पढ़ाई के लिए जनवरी 2025 में भेजने का निर्णय शायद लिया गया हो। विधायक पहली बार 2005 में मोकामा में विधानसभा का चुनाव जीते। तबसे वह लगातार जीत हासिल करते रहे हैं। यहाँ तक कि उनके जेल जाने के कारण जब मोकामा में उपचुनाव हुआ तो वर्ष 2022 में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने जीत हासिल की। अब ऐसी उम्मीद भी लगाई जा रही है कि #मोकामा से विधानसभा चुनाव में उनके बेटे किस्मत आजमा सकते हैं। दावेदारी तो सीट पर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार भी करते हैं लेकिन अनंत के सामने जब मुखिया मौन तो प्यादा क्या?
लेकिन शतरंज के खेल या सियासत के शतरंज में प्यादा (Pawn) सबसे निचले स्तर पर जरूर लेकिन महत्वपूर्ण? यह तो वक्त बतायेगा। अनंत की तूती के आगे सब मौन। जेल से निकलकर मुख्यमंत्री के साथ सीधी और शीघ्र मुलाकात करने वाले। जो सोचा वह कर गुजरे। अब जब पहली बार बीजेपी के ताजपोशी की बारी है। तब अनंत सिंह के अनंत इच्छा के आगे एनडीए मौन दिख रहा है?








