रांची। असम विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह आगामी 126 सदस्यीय असम विधानसभा चुनाव में 21 सीटों पर स्वतंत्र रूप से उम्मीदवार उतारेगी। जेएमएम ने अपने 21 उम्मीदवारों के नाम 9 अप्रैल को घोषित किए। यह फैसला विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे आदिवासी वोटों का विभाजन होने का खतरा बढ़ गया है।
आदिवासी वोटों में बिखराव का डर
असम कांग्रेस के नेता राकेश रंजन ने कहा कि पार्टी को उम्मीद थी कि जेएमएम गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ेगा। गौरव गोगोई और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने झारखंड जाकर जेएमएम से बातचीत की थी, लेकिन पार्टी ने अलग से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि जेएमएम के इस कदम से भाजपा विरोधी मतों में बंटवारा होगा, जिससे विपक्षी ताकतें कमजोर पड़ सकती हैं। झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने बताया कि कांग्रेस ने जेएमएम को 5 से 7 सीटें देने का प्रस्ताव रखा था।
इसके साथ ही उन क्षेत्रों में संगठनात्मक समर्थन देने का भी प्रस्ताव था, जहां जेएमएम अपने उम्मीदवार उतारे। कांग्रेस का उद्देश्य था कि एकजुट प्रयास के जरिए असम विधानसभा में जेएमएम का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार जेएमएम का स्वतंत्र चुनाव लड़ना असम के राजनीतिक समीकरण को बदल सकता है। विपक्षी गठबंधन की रणनीति प्रभावित होने की संभावना है और भाजपा विरोधी वोटों का विभाजन चुनावी परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है। अब असम में आदिवासी वोटों की स्थिति और गठबंधन की मजबूती चुनावी माहौल की बड़ी चुनौती बन गई है। इस फैसले के बाद असम विधानसभा चुनाव में राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन के समीकरण पर नजरें बनी रहेंगी।








